सोमवार 16 फ़रवरी 2026 - 10:44
जौहरी मुज़ाकरात और जंगी तैय्यारी

जौहरी मुज़ाकरात और जंगी तैय्यारी

तहरीर: सैयद करामत हुसैन शऊर जाफ़री

हौज़ा / ईरान की तदब्बुर भरी रौशनी और अमरीका की दोगली पॉलिसी आलमी सियासत में कुछ ऐसे रवैय्ये होते हैं जो अम्न को मज़बूत करने के बजाय उसे और मशकूक बना देते हैं। एक तरफ़ मुज़ाकरात, मुसाफ़हा और मुफ़ाहमत की बातें, और दूसरी तरफ़ जंगी तैय्यारियों की खुली नुमाइश यही वह तज़ाद है जो आज अमरीका के रवैय्ये में वाज़ेह नज़र आता है, और जिसके मुक़ाबले में ईरान का मुसालिह़ाना और संजीदा रवैया बिलकुल मुख़्तलिफ़ दिखाई देता है।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , ईरान की तदब्बुर भरी पॉलिसी और अमरीका की दोगली हिकमत-ए-अमली ने आलमी सियासत में एक नई बहस को जन्म दिया है। एक तरफ़ अम्न की बातें और दूसरी तरफ़ जंग की तैय्यारी यह रवैया अम्न की अलामत नहीं बल्कि बे-एतमादी का सबब है।

एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमरीकी फौज ईरान के खिलाफ ऐसी जंग की तैय्यारी कर रही है जो कई हफ्तों तक जारी रह सकती है। तैय्यारा-बरदार जहाज़, एटमी आब्दोज़ें और समंदर के रास्ते उतरने वाली जल-थल फौज की मश्क़ें इस बात की निशानी हैं कि अमरीका सफ़ारतकारी के साथ-साथ जंगी जुनून को भी ज़िंदा रखे हुए है।यह रवैया न अम्न की अलामत है और न जिम्मेदार आलमी क़ियादत की।

इसके बरअक्स ईरान का रवैया तहम्मुल, तदब्बुर और मुफ़ाहमत पर मब्नी दिखाई देता है। ईरान ने जौहरी मसले पर बातचीत का दरवाज़ा बंद नहीं किया, बल्कि अपने नुमाइंदे मस्क़त भेज कर वाज़ेह किया कि वह तनाज़े को जंग के बजाय मुज़ाकरात के ज़रिये हल करना चाहता है।

जौहरी प्रोग्राम के बारे में कुछ हुदूद क़बूल करने की आमादगी इस बात का सुबूत है कि ईरान कशिदगी कम करने और ख़ित्ते को तबाहकुन जंग से बचाने का ख़्वाहाँ है।

यह बात भी अहम है कि ईरान ने अपने दिफ़ाई और मिसाइल निज़ाम को मुज़ाकरात से अलग रखा है, जो किसी जारिहियत का इज़हार नहीं बल्कि अपनी ख़ुदमुख़्तारी और सलामती के फ़ितरी हक़ का बयान है। एक ख़ुदमुख़्तार रियासत से यह तवक़्क़ो रखना कि वह अपनी दिफ़ाई सलाहियत भी दूसरों की मर्ज़ी पर क़ुर्बान कर दे, दरअसल मुफ़ाहमत नहीं बल्कि दबाव और बालादस्ती की सोच है।

इसी पस-ए-मंज़र में ट्रप की जानिब से Benjamin Netanyahu से मुलाक़ात के बाद मुआहिदे की उम्मीद का इज़हार एक तज़ाद बन कर सामने आता है। अगर वाक़ई मुआहिदा मक़सूद है तो फिर बेक़्त जंगी तैय्यारियों का क्या जावाज़ है?यह दोगली पॉलिसी एतमाद पैदा करने के बजाय शकूक को बढ़ाती है।

ईरान का मुसालिह़ाना रवैया इस हक़ीक़त की गवाही देता है कि वह अम्न को कमज़ोरी नहीं बल्कि हिकमत समझता है, जबकि अमरीका की जंगी तैय्यारी और अस्करी दबाव उसके जंग-पसंद मिज़ाज और दोहरे मयार को बे-नक़ाब करते हैं। अम्न धमकियों से नहीं, नीयत की सच्चाई से कायम होता है।

अगर वाक़ई दुनिया को खूनरेज़ी से बचाना मक़सूद है तो उसे ईरान जैसे संजीदा और जिम्मेदार रवैयों की क़द्र करनी होगी, और अमरीका को अपनी जंगी जुनून पर मब्नी दोगली पॉलिसी पर संजीदगी से नज़र-ए-सानी करनी होगी क्योंकि तारीख़ गवाह है कि ताक़त के ज़ोर पर मुसल्लत किया गया अम्न, अम्न नहीं बल्कि एक वक़्फ़ा-ए-जंग होता है।

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